हर चर्चे निगाहें तांक कर शुरु होते और बातों में प्यार बनकर रह गुजरते। चाहें वो गली का माहौल हो या बाहर की सगंत या हो वो स्कूली दुनिया। जिसमें ये नज़ारा देखना व सुनना आम ही लगता है। जहां जब-जब इनकी सुर्खियां बढ़ती वहीं लोगों की दिल की बैचेनियां भी। किसी का नाम लब्जों पर लाकर थोड़ा मुस्कुराया तो सवाल सिर पर आ बरसते। कौन है ये? कहां रहती है? हमें नहीं मिलवाएगा क्या?
कुछ न बोलते न सुनते बस एक छोटे से नाम कि इतनी लम्बी कहानी बना देते और यहां पर कहानी बनते देर भी नहीं लगती। चाहें वो नाम किसी दोस्त का हो या परिवार के सदस्यो का हो बस, जिसे देखते ही बस इशारे बाजी शुरु हो जाती। और उस नाम को अपने से जोड़ते हुए इतराते। इन्ही लम्हों की कहानियां कभी न कभी गलियो में शरीख हो जाती है।
हाल ही में पेपरों के चलते हम सभी दोस्त एक साथ स्कूल जाते थे। पेन्ट में पैन रख और एक गत्ता पेन्ट की लुप्पी में टंगा सभी दोस्त हम टशन से निकलते। क्लास में भी एक साथ बैठते। पूरी क्लास में बस मैं, अतुल, लीलू और विक्की सबसे शरारती लड़के हैं। जब चाहा किसी के पास बैठ उस पर कई तड़तडाके छाप मारते और उन्हे किलसा देते। और सबसे खास शौक था हमारा कि अगर कहीं चॉक पड़ी मिली तो ब्लैक बोर्ड या दिवारों पर हम सभी अपना-अपना नाम लिखते। एक बार हम सभी दोस्त काफी देर से पहुंचे। अफरा-तफरी में कही और नज़रें घुमाए बिना पेपर की सीट पर निगाहे गड़ाए बैठे रहे। पैन चलता रहा और नज़रें किसी और की सीट पर टिकी रही। एक सवाल का जवाब किसी को न मिला सभी इंतजार कर रहे थे। समाजिक के सर के आने का अब तो फिक्र नहीं था। क्योंकि पास होने तक के नम्बरों तक पेपर कर ही लिया था। तो फिर तो हम यारों की टोली बन बस सब को चिड़ाने का जरिया तलाशने लगे। आज तक की मशहुर फिल्म गदर जिसके डायलॉग मन को भावुक कर देते है। मगर हम कहां ऐसे दर्शक हैं। जो किसी फिल्म को फिल्म की तरह देखे। बस उसके डायलॉग को अपनी हॅंसी -ठिठोली में शामिल कर सबको हॅसने का मस्त मौका देते हैं। जैसे कि उस फिल्म के किरदार को अपने बाकि दोस्तों को बना उन्हे हंसाने के लिए उन डायलॉगों को अपनी जान डाल देते। ताकि ये यादे हमें याद करने के लिए बनी रहें। किसी को सनी देओल बनाते तो किसी को वो हिरोईन का किरदार सोचते। फिर कोने में खड़े होकर सभी एक दूसरे पर छाप मारते जैसे -
अरी साकिया बाहर मत जा। मगर क्यूं - क्यूं पाप्पे?
क्योंकि बाहर पंजाबी तुझे मुझसे छिन लेगें।
सकिया -क्या पाप्पे?
सनी - तेरी गाड़ी की चाबी 11 जो तेरी मा ने दी थी।